एंडोक्राइनोलॉजी

अग्नाशय (पैंक्रियाज) और डायबिटीज संपूर्ण गाइड

डायबिटीज से जुड़ी हर जानकारी - HbA1c, इंसुलिन, मेटफॉर्मिन, GLP-1, टाइप 1 और टाइप 2 डायबिटीज। सब कुछ एक जगह।

14+ लेख | पूरी डायबिटीज जानकारी

Author:

अमित शर्मा

Sr. Medical Writer

Reviewed By:

डॉ. निशचिंता थापा

MD • Endocrinologist • 18+ वर्ष

Last Reviewed : 10 June 2026

Published: 5 June 2026

पैंक्रियाज और डायबिटीज

अग्नाशय (पैंक्रियाज) हमारे शरीर में दो काम करता है - पाचन में मदद करना और ब्लड शुगर कंट्रोल करना। इसके अंदर बीटा सेल्स होते हैं जो इंसुलिन बनाते हैं। इंसुलिन शुगर को कोशिकाओं तक पहुंचाता है।

जब पैंक्रियाज सही से काम नहीं करता या शरीर इंसुलिन का सही से इस्तेमाल नहीं कर पाता, तब डायबिटीज होती है। इस गाइड में हम आपके बनाए हुए सभी आर्टिकल्स को एक साथ लाए हैं।

नीचे हर टेस्ट और टॉपिक पर पूरी जानकारी दी गई है।

डायबिटीज और पैंक्रियाज के सभी टेस्ट व टॉपिक

हर टॉपिक पर पूरी जानकारी - नॉर्मल रेंज, लक्षण, कारण और इलाज

बीटा सेल्स और इंसुलिन

Beta Cells & Insulin

पैंक्रियाज की बीटा सेल्स कैसे बनाती हैं इंसुलिन

नॉर्मल इंसुलिन 2.6-24.9 µU/mL
बीटा सेल्स पैंक्रियाज में 50-70%

बीटा सेल्स पैंक्रियाज के अंदर मौजूद कोशिकाएं होती हैं जो इंसुलिन बनाती हैं। यह लेख बताता है कि ये सेल्स कैसे काम करती हैं और कैसे इंसुलिन ब्लड शुगर को कंट्रोल करता है।

इंसुलिन रेजिस्टेंस

Insulin Resistance

शरीर में इंसुलिन सही से काम न करने के संकेत

HOMA-IR (नॉर्मल) less than 2.0
जोखिम डायबिटीज, मोटापा

क्या आपको थकान, भूख ज्यादा लगना या वजन बढ़ना जैसी समस्या है? यह इंसुलिन रेजिस्टेंस के लक्षण हो सकते हैं। जानें इसके शुरुआती संकेत और कैसे करें बचाव।

मेटफॉर्मिन

Metformin

डायबिटीज की सबसे आम दवा

दवा का प्रकार बिगुआनाइड
खुराक 500mg - 2000mg/दिन

मेटफॉर्मिन टाइप 2 डायबिटीज में सबसे ज्यादा इस्तेमाल होने वाली दवा है। जानें यह कैसे काम करती है, इसके फायदे, साइड इफेक्ट्स और किन लोगों को यह दवा नहीं लेनी चाहिए।

GLP-1 एगोनिस्ट

GLP-1 Agonists

नई डायबिटीज दवाएं (ओज़ेम्पिक, विक्टोजा)

काम करने का तरीका इंसुलिन बढ़ाना, भूख कम करना
वजन पर असर वजन घटाती है

GLP-1 एगोनिस्ट दवाएं (जैसे ओज़ेम्पिक, विक्टोजा, ट्रूलिसिटी) कैसे ब्लड शुगर कंट्रोल करती हैं? जानें इनका तरीका, फायदे, साइड इफेक्ट्स और वजन घटाने में इनकी भूमिका।

HbA1c टेस्ट

HbA1c Test

3 महीने का औसत शुगर

नॉर्मल रेंज below 5.7%
प्रीडायबिटीज 5.7% - 6.4%
डायबिटीज 6.5% या उससे अधिक
टेस्ट कितनी बार हर 3-6 महीने में

HbA1c टेस्ट बताता है कि पिछले 2-3 महीनों में आपका ब्लड शुगर कैसा रहा है। यह टेस्ट डायबिटीज का पता लगाने और कंट्रोल चेक करने का सबसे भरोसेमंद तरीका है।

नॉर्मल ब्लड शुगर रेंज

Blood Sugar Ranges

उम्र के हिसाब से शुगर लेवल

फास्टिंग (बच्चे) 70-100 mg/dL
फास्टिंग (बड़े) 70-100 mg/dL
फास्टिंग (बुजुर्ग) 70-110 mg/dL
खाने के 2 घंटे बाद below 140 mg/dL

हर उम्र के लिए ब्लड शुगर की नॉर्मल रेंज अलग हो सकती है। जानें आपकी उम्र के हिसाब से फास्टिंग और खाने के बाद की शुगर कितनी होनी चाहिए।

प्रीडायबिटीज

Prediabetes Reversal

प्रीडायबिटीज को कैसे पलटें

फास्टिंग शुगर 100-125 mg/dL
HbA1c 5.7% - 6.4%

प्रीडायबिटीज डायबिटीज से पहले की स्थिति है, लेकिन इसे रिवर्स किया जा सकता है। जानें कौन से संकेत बताते हैं कि आपकी शुगर नॉर्मल हो रही है और डायबिटीज का खतरा कम हो रहा है।

पैंक्रियाज के लिए डाइट

Pancreas Diet

अग्नाशय को स्वस्थ रखने वाला आहार

अच्छा आहार हरी सब्जियां, फाइबर, लो GI फूड्स
बचें तला भुना, मीठा, प्रोसेस्ड फूड

पैंक्रियाज को स्वस्थ रखने के लिए सही खान-पान बहुत जरूरी है। जानें किन फूड्स से पैंक्रियाज मजबूत बनता है, किन चीजों से बचना चाहिए और डायबिटीज में क्या खाना चाहिए।

गर्भकालीन डायबिटीज

Gestational Diabetes

प्रेगनेंसी में डायबिटीज

कब होती है गर्भावस्था के 24-28 हफ्ते में
जोखिम बड़ा बच्चा, प्री-एक्लेम्पसिया

गर्भावस्था में होने वाली डायबिटीज मां और बच्चे दोनों को प्रभावित कर सकती है। जानें इसके रिस्क, लक्षण, इलाज और डिलीवरी के बाद यह कैसे ठीक होती है।

बिना डायबिटीज के शुगर कम होना

Hypoglycemia

नॉन-डायबिटिक हाइपोग्लाइसीमिया

लो शुगर की परिभाषा below 70 mg/dL
लक्षण चक्कर, पसीना, कमजोरी

क्या आपको डायबिटीज नहीं है फिर भी शुगर कम हो जाती है? जानें बिना डायबिटीज के हाइपोग्लाइसीमिया के कारण, लक्षण, क्या खाना चाहिए और इलाज के तरीके।

टाइप 1 डायबिटीज

Type 1 Diabetes

इंसुलिन पर निर्भर डायबिटीज

उम्र आमतौर पर बच्चे, युवा
इलाज इंसुलिन थेरेपी

टाइप 1 डायबिटीज में पैंक्रियाज इंसुलिन बनाना बंद कर देता है। जानें इसके कारण, शुरुआती लक्षण, इंसुलिन लेने के तरीके और कैसे मैनेज करें यह बीमारी।

टाइप 2 डायबिटीज

Type 2 Diabetes

सबसे आम डायबिटीज

उम्र आमतौर पर 30+
इलाज दवा, डाइट, एक्सरसाइज

टाइप 2 डायबिटीज में शरीर इंसुलिन बनाता है लेकिन सही से इस्तेमाल नहीं कर पाता (इंसुलिन रेजिस्टेंस)। जानें इसके कारण, लक्षण, दवाएं और लाइफस्टाइल में क्या बदलाव करें।

टाइप 1 और टाइप 2 डायबिटीज में अंतर

एक नजर में दोनों डायबिटीज की तुलना

विशेषता टाइप 1 डायबिटीज टाइप 2 डायबिटीज
क्यों होती है पैंक्रियाज इंसुलिन बनाना बंद कर देता है शरीर इंसुलिन का सही उपयोग नहीं कर पाता (रेजिस्टेंस)
किस उम्र में आमतौर पर बचपन या किशोरावस्था में आमतौर पर 30 साल के बाद
शरीर का वजन अक्सर पतले होते हैं अक्सर अधिक वजन या मोटापा होता है
इलाज इंसुलिन लेना जरूरी है पहले डाइट-एक्सरसाइज, फिर दवा, बाद में इंसुलिन भी
शुरुआती लक्षण अचानक और गंभीर होते हैं धीरे-धीरे आते हैं, पता भी नहीं चलता

डायबिटीज और पैंक्रियाज के लिए जरूरी टिप्स

ब्लड शुगर कंट्रोल और पैंक्रियाज को हेल्दी रखने के आसान उपाय

रोज एक्सरसाइज करें

रोज 30-45 मिनट वॉक, दौड़ या एक्सरसाइज करें। इससे इंसुलिन सेंसिटिविटी बढ़ती है और ब्लड शुगर कंट्रोल में रहता है।

संतुलित आहार लें

हरी सब्जियां, साबुत अनाज, दालें, कम मीठे फल और प्रोटीन खाएं। तला-भुना, मीठा और प्रोसेस्ड फूड से बचें।

वजन कंट्रोल रखें

अधिक वजन इंसुलिन रेजिस्टेंस का मुख्य कारण है। 5-7% वजन कम करने से भी डायबिटीज कंट्रोल में बहुत फायदा होता है।

शुगर टाइम से चेक करें

समय-समय पर फास्टिंग, खाने के बाद और HbA1c टेस्ट करवाते रहें। इससे पता चलता है कि आपकी डायबिटीज कंट्रोल में है या नहीं।

तनाव और नींद

तनाव और कम नींद से ब्लड शुगर बढ़ता है। योग, मेडिटेशन करें और रोज 7-8 घंटे की नींद लें।

शराब और धूम्रपान से बचें

शराब और धूम्रपान पैंक्रियाज को नुकसान पहुंचाते हैं और डायबिटीज का खतरा बढ़ाते हैं। अगर पीना है तो बहुत कम मात्रा में पिएं।